India के capital market regulator SEBI ने सोमवार, 24 मार्च को अपनी 209वीं बोर्ड मीटिंग आयोजित की। इस बैठक में ease of doing business, foreign portfolio investors (FPIs), market infrastructure institutions (MIIs), market analysts और disclosures से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। खास बात यह थी कि यह SEBI के नए चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे के नेतृत्व में पहली बोर्ड मीटिंग थी। उन्होंने 1 मार्च को माधबी पुरी बुच से पदभार ग्रहण किया था।

SEBI बोर्ड मीटिंग की मुख्य बातें:

FPIs के लिए अतिरिक्त डिस्क्लोजर की सीमा बढ़ी

अगर किसी Foreign Portfolio Investor (FPI) का दलाल स्ट्रीट पर इक्विटी AUM ₹50,000 करोड़ से अधिक हो जाता है, तो उसे अतिरिक्त डिस्क्लोजर देने होंगे। पहले यह सीमा ₹25,000 करोड़ थी। यह बदलाव कैश इक्विटी मार्केट में बढ़ते ट्रेडिंग वॉल्यूम को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

Alternative Investment Funds (AIFs) के लिए आसान हुए compliance नियम

अब Category II Alternative Investment Funds (AIFs) को A-rated लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की अनुमति मिल गई है, जैसे कि वे पहले अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में करते थे। पहले AIFs को मुख्य रूप से अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में ही निवेश करना पड़ता था, लेकिन नई लिस्टिंग नॉर्म्स के चलते यह मुश्किल हो गया था।

Public Interest Directors (PIDs) की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव

SEBI ने Market Infrastructure Institutions (MIIs) के बोर्ड में Public Interest Directors (PIDs) की नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा की।

  • PIDs की नियुक्ति में अब भी SEBI की स्वीकृति आवश्यक होगी, लेकिन शेयरहोल्डर अप्रूवल की आवश्यकता नहीं होगी।
  • यदि कोई MII बोर्ड किसी मौजूदा PID को फिर से नियुक्त करना चाहता है, तो उसे उचित कारण बताना होगा और SEBI को सूचित करना होगा।
  • Key management personnel को प्रतिस्पर्धी इकाई में शामिल होने से पहले एक cooling-off period से गुजरना होगा, लेकिन अब इसका निर्णय SEBI के बजाय MII बोर्ड करेगा।
  • अब Nomination & Remuneration Committee के बजाय, बोर्ड स्वयं नियुक्तियों, पुनर्नियुक्तियों और टर्मिनेशन को मंजूरी देगा।

Research Analysts को advance fees चार्ज करने की अनुमति

Investment Advisers और Research Analysts अब अपने क्लाइंट्स से 1 साल तक की एडवांस फीस चार्ज कर सकते हैं। पहले यह सीमा केवल 6 महीने थी। यह नियम केवल Individual और Hindu Undivided Family (HUF) क्लाइंट्स पर लागू होगा, Non-Individual क्लाइंट्स पर नहीं।

Conflict of Interest और Disclosures पर हाई-लेवल कमेटी बनेगी

SEBI ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है, जो Conflict of Interest, संपत्ति और निवेश डिस्क्लोजर और बोर्ड सदस्यों की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा करेगी

इस समिति में संवैधानिक संस्थाएं, नियामक संस्थान, सरकार, निजी क्षेत्र और अकादमिक क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल होंगे।

Merchant Banker, Debenture Trustee और Custodian Regulations पर निर्णय टला

Merchant Banker, Debenture Trustee और Custodian Regulations से जुड़े कुछ संशोधनों को फिलहाल अगली SEBI बोर्ड मीटिंग तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।