नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर सुल्तानपुर में सुभाष मार्केट में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन मातृभूमि सेवा संस्था सुल्तानपुर द्वारा किया गया, जिसमें संस्था के जिलाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार तिवारी, प्रांतीय अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव, प्रांतीय महामंत्री शिव मूर्ति पांडे, जिला उपाध्यक्ष रामचरित पांडे, डॉ. रमाशंकर मिश्रा, आलोक आर्या सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
इसके अलावा प्रदीप बरनवाल, बी.के. सिंह, अनुज सिंह, अरुण श्रीवास्तव, प्रदीप मिश्रा, अनुज श्रीवास्तव तथा सर्व व्यवस्था प्रमुख श्री कौशलेंद्र शुक्ला ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम में आए गणमान्य ने व्यक्त किए अपने विचार
कार्यक्रम की शुरुआत नेताजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद सभी सम्मानित व्यक्तियों ने उनके देशभक्ति से ओतप्रोत जीवन और त्यागमयी संघर्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
जिलाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार तिवारी ने अपने संबोधन में कहा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक ऐसा आदर्श हैं जो हमें अपने देश के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देते हैं। उनका संगठन कौशल और नेतृत्व आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। हमें उनके संघर्षों से सीख लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए।”
प्रांतीय अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने नेताजी के नेतृत्व में बने आज़ाद हिंद फौज के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा, “नेताजी का दृष्टिकोण हर भारतीय को प्रेरित करता है। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत को स्वतंत्रता संघर्ष के लिए आत्मनिर्भर होना चाहिए।”
प्रांतीय महामंत्री शिव मूर्ति पांडे ने कहा, “नेताजी का जीवन साहस और बलिदान का अनुपम उदाहरण है। उनके विचार हमें देशहित को सर्वोपरि रखने की शिक्षा देते हैं।”
आलोक आर्या ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “नेताजी का मातृभूमि के प्रति समर्पण और उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति हमें सिखाती है कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता, बशर्ते हम पूरी निष्ठा से प्रयास करें।”
नेताजी के बलिदान को नमन
कार्यक्रम का संचालन सर्व व्यवस्था प्रमुख कौशलेंद्र शुक्ला द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने नेताजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की शपथ ली।
यह आयोजन नेताजी के त्याग, बलिदान और साहस को नमन करने का एक सशक्त माध्यम बना और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।

