भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज भारतीय राजनीति में एक बेहद प्रभावशाली दल है। लेकिन इसका सफर इतना आसान नहीं था। यह एक लंबी प्रक्रिया और कई चुनौतियों के बाद संभव हुआ। भाजपा की जड़ें जनसंघ में हैं, जिसने भारतीय राजनीति में एक अलग विचारधारा की नींव रखी। हम आपको जनसंघ से भाजपा बनने तक की कहानी को समझने की कोशिश करेंगे, जिसमें प्रमुख घटनाओं, विचारधारा और नेतृत्व की भूमिका शामिल है।

जनसंघ की स्थापना: एक नई सोच की शुरुआत

साल 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की। उस समय, उनका मकसद हिंदुत्व, राष्ट्रवाद, और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना था। उन्होंने कांग्रेस के दबदबे को चुनौती देने के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच खड़ा किया।

जनसंघ की कुछ प्रमुख बातें:

  • राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर जोर।
  • धारा 370 का विरोध: कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा का विरोध।
  • स्वदेशी आंदोलन: भारतीय उद्योगों को बढ़ावा देने की वकालत।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नेतृत्व

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ को एक मज़बूत आधार दिया। लेकिन साल 1953 में उनकी दुखद मृत्यु, खासतौर पर कश्मीर मुद्दे पर विरोध जताने के दौरान, पार्टी के लिए एक बड़ा झटका थी। इसके बाद बलराज मधोक, दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं ने पार्टी को संभालने का काम किया।

दीनदयाल उपाध्याय और “एकात्म मानववाद”

साल 1960 के दशक में दीनदयाल उपाध्याय पार्टी के प्रमुख विचारक बनकर उभरे। उन्होंने “एकात्म मानववाद” का सिद्धांत पेश किया। यह सिद्धांत भारतीय समाज के समग्र विकास पर आधारित था। इस विचारधारा ने पार्टी को एक स्पष्ट वैचारिक दिशा दी।

जनसंघ का संघर्ष और विस्तार

साल 1967 के आम चुनावों में जनसंघ ने उत्तर भारत के कई राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया। यह कांग्रेस के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष के रूप में उभर रहा था। लेकिन पार्टी को सीमित संसाधनों और संगठनात्मक कमजोरियों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आपातकाल और जनता पार्टी का उदय

साल 1975 में लगाए गए आपातकाल ने भारतीय राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। इंदिरा गांधी की तानाशाही नीतियों के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हुए। साल 1977 में जनसंघ ने जनता पार्टी के साथ मिलकर इंदिरा गांधी को हराया। हालांकि, जनता पार्टी के भीतर वैचारिक मतभेद और RSS की भूमिका पर विवाद के कारण साल 1980 में जनसंघ के नेता अलग हो गए और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठन हुआ।

भाजपा के गठन के उद्देश्य:

भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना।

दीनदयाल उपाध्याय के “एकात्म मानववाद” के विचार को लागू करना।

भ्रष्टाचार और वंशवाद के खिलाफ राजनीति को मजबूत करना।

भाजपा के शुरुआती संघर्ष

साल 1980 के दशक भाजपा के लिए कठिन थे। साल 1984 के चुनावों में पार्टी को केवल 2 सीटें मिलीं। लेकिन हार से सीख लेते हुए भाजपा ने संगठन को मजबूत किया। अटल बिहारी वाजपेयी जी और लालकृष्ण आडवाणी ने नेतृत्व संभाला और पार्टी के एजेंडे को स्पष्ट किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन और भाजपा का उदय

साल 1989 के बाद, भाजपा ने राम जन्मभूमि आंदोलन को अपने एजेंडे का केंद्र बनाया। यह आंदोलन पार्टी के लिए जनाधार बढ़ाने का बड़ा कारण बना। साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस ने भाजपा को व्यापक समर्थन दिया।

इस आंदोलन के प्रभाव:

भाजपा का उत्तर भारत में जनाधार मज़बूत हुआ।

हिंदुत्व विचारधारा को राष्ट्रीय राजनीति में स्थान मिला।

भाजपा का सत्ता में आगमन

साल 1996 में भाजपा पहली बार सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, लेकिन सरकार केवल 13 दिन चली। साल 1998 और साल 1999 में, पार्टी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) बनाकर स्थिर सरकार चलाई। अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में पार्टी ने प्रभावशाली शासन प्रदान किया।

वाजपेयी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां:

आर्थिक सुधार: बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर।

परमाणु परीक्षण: 1998 में पोखरण परीक्षण से भारत को वैश्विक पहचान मिली।

भारत-पाक संबंध: कारगिल युद्ध के बावजूद शांति प्रयास।

पीएम नरेंद्र मोदी का युग: भाजपा का स्वर्णकाल

2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया। उनकी सरकार ने “डिजिटल इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “स्वच्छ भारत अभियान” जैसे बड़े कार्यक्रम शुरू किए। 2019 में पार्टी ने अपनी जीत को दोहराया, इसके बाद साल 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

मोदी सरकार की प्रमुख नीतियां:

धारा 370 का हटाना: कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना।

तीन तलाक का विरोध: मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाना।

आत्मनिर्भर भारत: भारत को आत्मनिर्भर बनाने की पहल।

भाजपा का संगठन और विचारधारा

भाजपा का संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ गहरे जुड़ा हुआ है। इसकी विचारधारा हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सामाजिक न्याय पर आधारित है। इसके अलावा भाजपा का कैडर-बेस संगठन इसकी मजबूती की पहचान है।

जनसंघ से भाजपा तक का सफर केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं है। यह भारत के समाज और राजनीति के बदलाव का प्रतिबिंब है। आज भाजपा न केवल भारत की सबसे बड़ी पार्टी है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र और विकास की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।