पीएम मोदी ने आज नागपुर में RSS मुख्यालय का दौरा किया। यह दौरा न केवल ऐतिहासिक था, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला संघ मुख्यालय दौरा था, जो RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान हुआ।
पीएम मोदी का संघ मुख्यालय दौरा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दौरे की शुरुआत रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित कर की। इस अवसर पर उन्होंने इसे ‘सौभाग्य की बात’ बताते हुए संघ के साथ अपने पुराने दिनों को याद किया। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि संघ ने उन्हें अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा की प्रेरणा दी है, जो उनके राजनीतिक जीवन की नींव बनी।

इसके पश्चात, प्रधानमंत्री ने माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखी। यह 250 बिस्तरों वाला नेत्र चिकित्सालय और अनुसंधान केंद्र होगा, जिसमें अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस परियोजना का उद्देश्य सस्ती और विश्वस्तरीय नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है, जिससे समाज के हर वर्ग को लाभ मिलेगा।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठक
इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी उपस्थित थे। पीएम मोदी और मोहन भागवत ने मंच साझा किया और कार्यक्रम के उपरांत एक अलग बैठक भी की। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर चर्चा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात का भारतीय जनता पार्टी और संघ के संबंधों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।

पीएम मोदी और RSS का संबंध
पीएम मोदी का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव 1970 के दशक से रहा है। उन्होंने किशोरावस्था में ही RSS की शाखाओं में भाग लेना शुरू कर दिया था। 1971 में, जब वे केवल 21 वर्ष के थे, तब वे संघ के प्रचारक बन गए।
आपातकाल (1975-77) के दौरान, मोदी ने भूमिगत रहते हुए संघ के लिए कार्य किया और सरकार विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया। बाद में, वे भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने लगे और 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। उनके नेतृत्व में गुजरात में RSS की विचारधारा का प्रभाव और गहरा हुआ।
RSS की भूमिका मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में
RSS ने पीएम मोदी के राजनीतिक उत्थान में अहम भूमिका निभाई।
- राजनीतिक मार्गदर्शन: संघ ने मोदी को अनुशासन, संगठन क्षमता और राष्ट्रवाद की विचारधारा दी, जिसने उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाया।
- गुजरात मॉडल का प्रचार: RSS से जुड़े संगठनों ने मोदी के गुजरात मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने में मदद की।
- लोकसभा चुनाव 2014 और 2019: दोनों चुनावों में संघ के कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर प्रचार किया और मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- नए भारत की अवधारणा: मोदी की ‘नए भारत’ की सोच RSS के हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार से मेल खाती है, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
पीएम मोदी का यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह दौरा न केवल RSS और भाजपा के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मोदी के समर्थन का भी प्रतीक है।
इस दौरे से संकेत मिलता है कि आने वाले चुनावों में RSS और भाजपा के बीच समन्वय और मजबूत होगा। साथ ही, यह दौरा संघ के विचारों और योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती देने में सहायक साबित हो सकता है।
पीएम मोदी और RSS का रिश्ता दशकों पुराना है और इसने भारतीय राजनीति को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नागपुर में संघ मुख्यालय का दौरा पीएम मोदी के लिए व्यक्तिगत रूप से भी खास था और भाजपा-संघ संबंधों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम। यह दौरा आगामी राजनीतिक परिदृश्य और रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।

