पंचक एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है, जिसे हिंदू धर्म में विशेष माना जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार पंचक शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है, लेकिन इसका ध्यान रखकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है. पंचक के दौरान साधना और ध्यान केंद्रित करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है, जिससे जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखा जा सकता है.
इस साल यानि 2025 में हिंदू पंचांग के अनुसार पंचक 26 मार्च दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर पांच दिन यानि 30 मार्च शाम 4 बजकर 37 मिनट तक रहेगा.
इन पांच दिनों में व्यक्ति को कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही कही जाती है. पंचक का समय हर महीने में आता है, और यह चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है. यह समय प्रत्येक माह में विभिन्न तिथियों पर आता है, जिससे हर महीने पंचक के दिन अलग-अलग होते हैं.
पंचक का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में पंचक वह समय होता है, जब जब चंद्रमा मकर राशि से लेकर कुम्भ राशि तक विचरण करता है, यह यात्रा 5 दिनों की होती है, जिसमें चंद्रमा इन राशियों में से हर एक पर एक-एक दिन बिताता है. इस दौरान चंद्रमा के प्रभाव को विशेष रूप से हानिकारक माना जाता है. पंचक की शुरुआत मकर राशि से होती है और कुम्भ राशि तक पहुंचने तक पांच दिन होते हैं, जो पंचक कहलाते है.
पंचक के द्वारा पड़ने वाले प्रभाव
पंचक के समय को असमय मृत्यु, शोक, दुर्घटना, और अन्य नकारात्मक घटनाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है. इसलिए, पंचक के दिनों में शुभ कार्यों जैसे विवाह, नया व्यवसाय शुरू करना, यात्रा आदि से बचने की सलाह दी जाती है. पंचक के दिनों में विशेष ध्यान, पूजा, और व्रत करने से जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति होती है. तंत्र-मंत्र और साधना में भी पंचक का महत्व है.
हिंदू धर्म के अनुसार, पंचक में मृत्यु के समय शव को तुरंत न ले जाने की सलाह दी जाती है. शव को पंचक समाप्त होने के बाद ही दफनाने या जलाने की परंपरा है.
पंचक के समय में विवाह, गृह प्रवेश, या अन्य शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है क्योंकि इसे अशुभ समय माना जाता है.


