मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए 40,000 से अधिक बांग्लादेशी नागरिकों के जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को रद्द करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में यह फैसला उन लोगों की पहचान के लिए लिया गया है, जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे।

अवैध प्रवासियों पर कड़ी कार्रवाई

महाराष्ट्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान के लिए सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि हजारों लोगों ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर भारतीय नागरिकता हासिल करने की कोशिश की। अब सरकार ने ऐसे दस्तावेजों को अमान्य घोषित कर दिया है, जिससे उनकी नागरिकता पर संकट गहरा सकता है।

प्रशासन की सख्त नीति जारी

मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में किसी भी अवैध प्रवासी को पनाह नहीं दी जाएगी। उन्होंने प्रशासन और पुलिस को निर्देश दिए हैं कि अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को तेज किया जाए।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार का जोर

भारत में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर सख्त कदम उठा रही हैं। इससे पहले भी कई राज्यों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट किया गया है।

महाराष्ट्र सरकार का यह कदम अवैध प्रवासियों के खिलाफ देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय नागरिकता हासिल न कर सके।