काशी यानि वाराणसी महादेव की ये नगरी सिर्फ़ आस्था और मोक्ष की नगरी ही नहीं, बल्कि प्राचीन आयुर्वेद और चिकित्सा का केंद्र भी माना जाता है। इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है धन्वंतरि कूप, जो भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। कहा जाता है कि इस कूप का जल औषधीय गुणों से भरपूर है और यह अनेक रोगों का उपचार करने में सक्षम है। इसका जल केवल प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि आरोग्य प्रदान करने के लिए भी जाना जाता है।
धन्वंतरि कूप का पौराणिक महत्व
जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। वे आयुर्वेद के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं और सभी रोगों को हरने वाले चिकित्सक देवता हैं।
ऐसा कहा जाता है कि स्वयं भगवान धन्वंतरि ने काशी में इस कूप को प्रकट किया था और इसका जल अमृततुल्य है। प्राचीन समय में, ऋषि-मुनि और वैद्य इस जल का उपयोग औषधियों के निर्माण में करते थे।
धन्वंतरि कूप का महत्व
इसमें प्राकृतिक रूप से औषधीय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को निरोगी बनाए रखने में सहायक हैं।
भक्तजन यहां आकर भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं और इस जल को ग्रहण कर स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं। यह स्थान आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की प्राचीनता और महत्व को दर्शाता है।
स्थान और महत्व
यह काशी के पंचगंगा घाट के पास स्थित है। मान्यता है कि इस कूप का जल औषधीय गुणों से युक्त है और विभिन्न रोगों को दूर करने की क्षमता रखता है।


