हिंदु धर्म के अनुसार चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व रहता है, हिंदु पंचाग के अनुसार चैत्र नवरात्रि के दिन से ही नया साल शुरू होता है। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चलने वाली इस नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के साथ-साथ व्रत, पूजन और अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्रि पर खरमास का साया है, जिससे कुछ धार्मिक कार्यों के निषेध की चर्चा हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या खरमास का प्रभाव नवरात्रि की पूजा-पद्धति पर भी पड़ेगा? आइए जानते हैं कि इस संयोग का आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से क्या महत्व है।
क्या होता है खरमास?
खरमास को गुरु अस्त भी कहा जाता है, जब बृहस्पति ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाने के कारण अदृश्य हो जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, और अन्य शुभ मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है।
खरमास का चैत्र नवरात्रि पर क्या रहेगा प्रभाव ?
1. क्या व्रत-पूजा पर असर पड़ेगा?
खरमास का असर केवल विवाह और गृहस्थ जीवन से जुड़े संस्कारों पर होता है, न कि उपासना और तपस्या पर। इसलिए, भक्तजन नवरात्रि में माँ दुर्गा की आराधना, व्रत, हवन और जप कर सकते हैं।
2. क्या घट स्थापना कर सकते हैं?
हाँ, घट स्थापना पूरी विधि-विधान से की जा सकती है, क्योंकि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है और खरमास इसका निषेध नहीं करता।
3. क्या नया काम शुरू करना सही रहेगा?
व्यापार, शिक्षा, साधना और आध्यात्मिक कार्यों की शुरुआत खरमास के दौरान की जा सकती है, लेकिन गृहस्थ जीवन से जुड़े कार्य जैसे शादी या गृह प्रवेश को टालना उचित माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि और खरमास का संयोग
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च 2025 से हो चुकी है, जबकि खरमास 14 मार्च से शुरू होकर 13 अप्रैल 2025 तक रहेगा। ऐसे में नवरात्रि का अधिकांश भाग खरमास के प्रभाव में आएगा।
नवरात्रि में खरमास के दौरान क्या करें और क्या न करें?
✅ करने योग्य कार्य:
माँ दुर्गा के नौ रूपों की श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ करें।
हवन, जाप और ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करें।
जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करें।
❌ न करने योग्य कार्य:
विवाह, गृह प्रवेश या नए कार्यों की शुरुआत टालें।
मुंडन या अन्य मांगलिक कार्य करने से बचें।
नकारात्मक विचारों और बुरी संगत से दूर रहें।


