अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। जनवरी और फरवरी की तुलना में मार्च में रूसी तेल की खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।

भारत क्यों बढ़ा रहा है रूसी तेल का आयात?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारतीय बाजार के लिए न सिर्फ आसानी से उपलब्ध है, बल्कि यह 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर मिल रहा है। किफायती दरों पर तेल मिलने से भारत को बिना किसी कठिनाई के जहाज और बीमा सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

इसके अलावा, यूक्रेन द्वारा रूस के तेल रिफाइनरी संयंत्रों पर किए गए ड्रोन हमलों के कारण घरेलू खपत में गिरावट आई है। इस वजह से रूस को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मात्रा में तेल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे भारत जैसे देशों को सस्ता तेल मिल रहा है।

आंकड़ों में दिखी रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी

तेल बाजार की निगरानी करने वाली प्रमुख कंपनी केप्लर (Kpler) के अनुसार, मार्च के पहले 21 दिनों में भारत ने रूस से औसतन 1.85 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा। जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 1.47 मिलियन बैरल प्रतिदिन और जनवरी में 1.64 मिलियन बैरल प्रतिदिन था।

भारत द्वारा मार्च में खरीदे गए कुल तेल में रूस की हिस्सेदारी 35% रही, जो फरवरी में 31% और जनवरी में 33% थी। पिछले दो वर्षों में भारत और चीन रूस से सबसे अधिक तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं।

अमेरिकी प्रतिबंधों का असर क्यों नहीं दिख रहा?

जनवरी 2024 में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए, जिनमें 183 जहाजों, रूसी तेल कंपनियों और बीमा कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध शामिल थे। इसके बावजूद रूस का तेल निर्यात जारी है, और भारत सहित कई देश इस सस्ते तेल का लाभ उठा रहे हैं।

रूसी तेल पर प्रतिबंध, फिर भी बढ़ती आपूर्ति?

शुरुआती दौर में भारतीय तेल कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जहाजों और बीमा सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों से लेनदेन प्रभावित हुआ था।

हालांकि, जब रूस के कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गई, तो G7 देशों और उनके सहयोगियों ने नियमों में ढील दी। इस शर्त के तहत, अगर रूसी तेल 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर बेचा जाता है, तो पश्चिमी देश शिपिंग और बीमा सेवाओं की अनुमति दे सकते हैं। केप्लर के अनुसार, भारत में आने वाले सभी रूसी तेल जहाज प्रतिबंधों से मुक्त हैं, जिससे भारत को तेल आयात में किसी तरह की बाधा नहीं हो रही है।

अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी इजाफा किया है। सस्ते तेल की उपलब्धता, बढ़ती मांग और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों में लचीलापन भारतीय तेल कंपनियों को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रेरित कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का रूसी तेल व्यापार पर सीमित प्रभाव पड़ा है और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है।