समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता रामजी लाल सुमन के विवादित बयान ने देशभर में हलचल मचा दी है। उन्होंने मेवाड़ के महान योद्धा राणा सांगा को गद्दार कहकर इतिहास को पूरी तरह से विकृत करने का प्रयास किया। विवाद और बढ़ा जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बयान का समर्थन कर दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या सपा का इतिहास ज्ञान अधूरा है, या फिर यह एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है, जिससे देश में अस्थिरता फैलाई जाए?
राणा सांगा: भारत के वीर योद्धा
राणा सांगा (1482-1528) न केवल मेवाड़ बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरणास्रोत रहे हैं। उन्होंने दिल्ली सल्तनत, गुजरात सल्तनत और मुगल आक्रमणकारियों के खिलाफ अनेक युद्ध लड़े और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक देने को तैयार रहे। 1527 में बाबर के खिलाफ लड़ी गई खानवा की ऐतिहासिक लड़ाई में उन्होंने अद्वितीय साहस का परिचय दिया।

उनका उद्देश्य सिर्फ मेवाड़ की रक्षा करना नहीं था, बल्कि पूरे भारत को विदेशी आक्रमणकारियों से मुक्त कराना था। फिर ऐसे महान योद्धा को गद्दार कहना किस मानसिकता को दर्शाता है?
गद्दार कौन? ऐतिहासिक दृष्टि से सटीक परिभाषा
अगर हम ऐतिहासिक तथ्यों को देखें, तो गद्दार उस व्यक्ति को कहा जाता है, जिसने अपने राष्ट्र, धर्म, या जनता के साथ छल किया हो।
- क्या राणा सांगा ने बाबर से मिलकर भारत के साथ विश्वासघात किया? नहीं।
- क्या उन्होंने अपनी मातृभूमि को लुटेरों के हवाले किया? नहीं।
- बल्कि उन्होंने हिंदू और राजपूत शक्तियों को एकजुट कर विदेशी ताकतों से मुकाबला किया।
अगर हम इतिहास में असली गद्दारों की तलाश करें, तो हमें कई ऐसे शासक और नेता मिलेंगे, जिन्होंने अपनी सत्ता के लिए विदेशी आक्रमणकारियों के सामने घुटने टेक दिए। अब यह पाठकों को तय करना है कि गद्दार की यह परिभाषा किस पर लागू होती है।
सपा और अखिलेश यादव की ऐतिहासिक समझ पर सवाल
रामजी लाल सुमन का बयान केवल एक व्यक्ति की गलती नहीं है, बल्कि यह समाजवादी पार्टी की व्यापक सोच और उनकी ऐतिहासिक समझ को उजागर करता है।
- अधूरा इतिहास ज्ञान – क्या सपा नेता इतिहास की सही किताबें नहीं पढ़ते?
- वोट बैंक की राजनीति – क्या सपा इतिहास को तोड़-मरोड़कर किसी विशेष समुदाय को खुश करना चाहती है?
- देश के नायकों का अपमान – यह पहली बार नहीं है जब सपा नेताओं ने राष्ट्र नायकों पर विवादित बयान दिए हैं।
सपा की राजनीति: देश को बांटने की साजिश?
समाजवादी पार्टी का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे कि यह पार्टी बार-बार ऐसे बयान देकर विवाद खड़ा करती रही है। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि समाज को विभाजित करने और राजनीतिक फायदा उठाने की एक सोची-समझी चाल है। सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी भारतीय इतिहास को विकृत करके किसी विशेष समुदाय का समर्थन हासिल करना चाहती है?
- क्या आने वाले समय में सपा महाराणा प्रताप, शिवाजी और भगत सिंह जैसे महापुरुषों पर भी सवाल उठाएगी?
- क्या उनकी इतिहास की किताबों में बाबर, औरंगजेब और खिलजी को महानायक बना दिया जाएगा?
इतिहास से छेड़छाड़ को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा
राणा सांगा को गद्दार कहना न केवल ऐतिहासिक भूल है, बल्कि एक गहरी मानसिकता का परिचायक भी है। यह बयान एक बार फिर साबित करता है कि समाजवादी पार्टी इतिहास को अपने राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ रही है।
अगर सपा ने अपनी विचारधारा नहीं बदली और राष्ट्र नायकों का अपमान जारी रखा, तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें इतिहास का कूड़ेदान बना देंगी।
भारत अपने नायकों का सम्मान करना जानता है, और जो भी उनके गौरव को धूमिल करने की कोशिश करेगा, उसे जनता चुनावों में करारा जवाब देगी।

